एनसीईआरटी सॉल्यूशंस फॉर क्लास 12 चैप्टर 3 विद्युत धारा एक आवश्यक संसाधन सामग्री है जिसकी आवश्यकता सभी छात्रों को कक्षा 12 की भौतिकी की अवधि – I की परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए होती है। एनसीईआरटी सॉल्यूशंस फॉर क्लास 12 फिजिक्स पीडीएफ, यहां उपलब्ध कराया गया है जिसे मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। छात्र पाठ्यपुस्तक में दिए गए प्रश्नों के उत्तर, अनुकरणीय समस्याओं, वर्तमान बिजली कक्षा 12 पीडीएफ पर संख्यात्मक, वर्कशीट और अभ्यास के साथ प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 12 भौतिकी के लिए विद्युत धारा एनसीईआरटी समाधान भौतिकी कक्षा 12 अध्याय 3 के नोट्स की तैयारी में सहायता करता है और संशोधन के दौरान काम आएगा। ये एनसीईआरटी सॉल्यूशंस विषय विशेषज्ञों द्वारा नवीनतम टर्म - I सीबीएसई सिलेबस 2021-22 और इसके दिशानिर्देशों के अनुसार बनाए गए हैं। साथ ही, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के डाउनलोड विकल्प उपलब्ध होने के कारण ये एनसीईआरटी सॉल्यूशंस फॉर क्लास 12 फिजिक्स को फिजिक्स टर्म - I परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे अच्छा संसाधन बनाता है।
कक्षा 12 भौतिकी के लिए एनसीईआरटी समाधान के अध्याय 3 में शामिल विषय हैं -
3.1 परिचय
3.2 विद्युत धारा
3.3 कंडक्टरों में विद्युत धाराएं
3.4 ओम का नियम
3.5 इलेक्ट्रॉनों का बहाव और प्रतिरोधकता की उत्पत्ति
3.5.1 गतिशीलता
3.6 ओम के नियम की सीमाएं
3.7 विभिन्न सामग्रियों की प्रतिरोधकता
3.8 प्रतिरोधकता की तापमान निर्भरता
3.9 विद्युत ऊर्जा, शक्ति
3.10 प्रतिरोधों का संयोजन-श्रृंखला और समानांतर
3.11 सेल, ईएमएफ, आंतरिक प्रतिरोध
3.12 श्रृंखला में और समानांतर में सेल
3.13 किरचॉफ के नियम
3.14 व्हीटस्टोन ब्रिज
3.15 मीटर ब्रिज
3.16 विभवमापी
प्रश्न 1. चालक के प्रतिरोध की परिभाषा दीजिए ।
उत्तर- इलेक्ट्रॉन प्रवाह में किसी चालक में बाधा की उपस्थित को उस चालक का प्रतिरोध कहते हैं ।
प्रश्न 2. किसी विद्युत् परिपथ की विद्युत् शक्ति क्या है ?
उत्तर- किलोवाट घंटा ।
प्रश्न 5. मीटर ब्रिज किस सिद्धान्त पर कार्य करता है ?
उत्तर- व्हीटस्टोन ब्रिज के सिद्धान्त पर ।
प्रश्न 6 मीटर ब्रिज को इस नाम से क्यों जाना जाता है ? -
उत्तर- क्योंकि इसमें एक मीटर लम्बे तार का उपयोग होता है ।
प्रश्न 7. व्हीटस्टोन ब्रिज कब सन्तुलित कहलाता है ?
उत्तर- जब व्हीटस्टोन ब्रिज में सेल तथा धारामापी दोनों की कुंजियाँ बन्द होने पर धारामापी में कोई विक्षेप नहीं आता अर्थात् इनकी भुजा में कोई धारा प्रवाहित न हो , तो सन्तुलित कहलाता है ।
प्रश्न 8. व्हीटस्टोन सेतु के सर्वाधिक सुग्राही हो की शर्त क्या है ?
उत्तर- इनके चारों भुजाओं में लगे प्रतिरोध एक ही क्रम के होने चाहिए ।
प्रश्न 9. मीटर सेतु की सुग्राहिता सर्वाधिक कब होती है ? -
उत्तर- जब शून्य विक्षेप स्थिति मीटर सेतु के तार के मध्य बिन्दु के लगभग प्राप्त होती है ।
प्रश्न 10. जॉकी कुंजी को दबाकर विभवमापी को तार पर नहीं खिसकाना चाहिये , क्यों ?
उत्तर- दबाकर तार पर खिसकाने से उस जगह का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बदलेगा और एकसमान नहीं रहेगा , जबकि विभवमापी में तार का प्रत्येक स्थान पर अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल समान होना चाहिये ।
प्रश्न 11. विभवमापी के तार में वैद्युत धारा अधिक समय के लिए क्यों प्रवाहित नहीं करनी चाहिए ?
उत्तर - क्योंकि अधिक समय तक धारा प्रवाहित करने से तार के गर्म होने से इसका प्रतिरोध बढ़ जायेगा । अतः तार की विभव प्रवणता का मान बदल जायेगा ।
प्रश्न 12. विद्युत वाहक बल किसे कहते है ।
उत्तर - एकांक धनावेश को पूरे परिपथ में ( क्षेत्र सहित ) चलाने के लिए सेल को जितना कार्य करना पड़ता है उसे उस सेल का विद्युत वाहक बल कहते है ।
प्रश्न 13. निम्न का अर्थ समझाइए
( i ) प्रतिरोधकता ( ii ) विशिष्ट चालकता ( iii ) विभव प्रवणता ।
उत्तर - ( i ) प्रतिरोधकता -
( ii ) विशिष्ट चालकता -
( iii ) विभव प्रवणता- विभवमापी में दरी के साथ विभव पतन को विभव प्रवणता कहा जाता है । इसका मात्रक V / m होता है ।
प्रश्न 15. किसी धात्विक चालक में अपवाह वेग का मान उसके ताप में वृद्धि के संगत किस प्रकार परिवर्तित होता है ।
उत्तर- किसी धात्विक चालक का ताप बढ़ाने पर उसके मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संघट्ट आवृत्ति का मान बढ़ता हैं । जिससे अपवाद वेग का मान घट जाता हैं ।
प्रश्न 16. जब किसी चालक के सिरों पर विभवांतर आरोपित किया जाता है तब मुक्त इलेक्ट्रॉनों की आवृच्छिक गति किस प्रकार प्रभावित होती हैं ?
उत्तर- जब किसी चालक के दोनों सिरों के परितः विभवांतर आरोपित किया जाता हैं तो मुक्त इलेक्ट्रॉनों की आवृच्छिक गति धनात्मक सिरे की ओर होती हैं अर्थात् उच्च विभव के सिरे की ओर होती हैं ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत् धारा क्या है ? इसका मात्रक लिखिए ।
उत्तर- किसी चालक के अनुप्रस्थ परिच्छेद से एकांक समय में प्रवाहित आवेश की मात्रा को चालक में प्रवाहित धारा कहते हैं । इसे I से व्यक्त करते हैं । इसका मात्रक ऐम्पियर होता है ।
प्रश्न 2. विद्युत् धारा अदिश राशि है या सदिश ? -
उत्तर - किसी विद्युत् परिपथ में धनावेशों के प्रवाह की दिशा में विद्युत् धारा प्रवाहित होती है , फिर भी विद्युत् धारा एक अदिश राशि है । जब कई तारों से प्रवाहित धाराएँ मिलकर किसी दिशा में प्रवाहित होती हैं , तो वहाँ अदिश योग का नियम लगता है , सदिश योग का नियम लागू नहीं होता , अतः विद्युत् धारा एक अदिश राशि है ।
प्रश्न 3. धारा घनत्व क्या है ? यह अदिश होता है या सदिश ?
उत्तर- किसी चालक के एकांक अनुप्रस्थ परिच्छेद से प्रवाहित धारा को चालक का धारा घनत्व कहते हैं । इसे J से व्यक्त किया जाता है । यह एक सदिश राशि है ।
प्रश्न 5. धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यधिक होती है किन्तु विद्युत् क्षेत्र की अनुपस्थिति में उनमें से विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं होती , क्यों ?
उत्तर- धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक होती है और ये बर्तन में गैस अणुओं की भाँति तीव्र वेग से अनियमित गति करते रहते हैं । इसे तापीय गति भी कहते हैं , क्योंकि यह अनियमित गति धातुओं की तापीय ऊर्जा के कारण होती है । गति के दौरान ये इलेक्ट्रॉन धनायनों से टकराते हैं , जिससे उनके गति की दिशा बदलती जाती है । तथा विद्युत् क्षेत्र की अनुपस्थिति में धातुओं में किसी निश्चित दिशा में परिणामी गति शून्य होती है , अतः धातुओं में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती ।
प्रश्न 7. ओमीय व अन - ओमीय प्रतिरोधों में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर- ओमीय प्रतिरोध का मान एक नियत ताप पर नियत रहता है , जबकि अन - ओमीय प्रतिरोध आरोपित वोल्टेज पर निर्भर करते हैं ।
प्रश्न 8. प्रतिरोधकता ( या विशिष्ट प्रतिरोध ) की परिभाषा दीजिए एवं मात्रक बताइये ।
उत्तर- किसी पदार्थ के एकांक परिच्छेद वाले एकांक लम्बाई के चालक के प्रतिरोध को चालक का विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता कहते हैं । S.I. पद्धति में प्रतिरोधकता का मात्रक ओम - मीटर होता है ।
प्रश्न 9. ताँबे के तार की त्रिज्या आधी कर दी जाये , तो उसकी प्रतिरोधकता पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर- ताँबे के तार की त्रिज्या आधी करने पर उसकी प्रतिरोधकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।
प्रश्न 10. ऐसे तीन पदार्थों के नाम बताइए , जिनकी प्रतिरोधकता ताप बढ़ाने पर घटती है ।
उत्तर- कार्बन , सिलिकॉन तथा जर्मेनियम ऐसे पदार्थ हैं , जिनका ताप बढ़ाने पर प्रतिरोधकता घटती है ।
प्रश्न 12. प्रामाणिक प्रतिरोध बनाने के लिए किन - किन मिश्र धातुओं का उपयोग किया जाता है और क्यों ?
उत्तर- प्रामाणिक प्रतिरोध बनाने के लिए मैंगनीन , कान्स्टेन्टन , नाइक्रोम आदि मिश्र धातुओं का उपयोग किया जाता है , क्योंकि इनकी प्रतिरोधकता अधिक होती है तथा प्रतिरोधकता ताप गुणांक कम होता है ।
प्रश्न 13. मैंगनीन के दो गुण लिखिए , जिसके कारण उसे प्रामाणिक प्रतिरोध बनाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है ।
उत्तर- ( i ) मैंगनीन के तार की प्रतिरोधकता अधिक होती है ।
( ii ) मैंगनीन के तार का प्रतिरोधकता ताप गुणांक कम होता है ।
प्रश्न 14. थर्मिस्टर क्या है ?
उत्तर- थर्मिस्टर एक ऐसी ताप संवेदी युक्ति है , जिसकी प्रतिरोधता ताप परिवर्तन होने पर तेजी से परावर्तित होती है ।
प्रश्न 15. अतिचालकता क्या है ?
उत्तर- कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं , जिनकी प्रतिरोधकता ताप में परिवर्तन के साथ असामान्य रूप से परिवर्तित होती है । इन पदार्थों का ताप कम करने पर प्रतिरोधकता घटती जाती है । एक विशेष ताप पर एकाएक प्रतिरोधकता शून्य हो जाती है । इस ताप को क्रान्तिक ताप कहते हैं , अतः क्रान्तिक ताप या उसके नीचे किसी पदार्थ की प्रतिरोधकता शून्य हो जाती है । इस घटना को अतिचालकता कहते हैं ।
प्रश्न 16. सम्बन्धन तार ताँबे के बनाये जाते हैं तथा मोटे होते हैं । क्यों ?
अथवा
विद्युत परिपथ में उपयोग में लाये जाने वाले तार ताँबे या एल्युमिनियम के बने होते हैं । क्यों ?
उत्तर- सम्बन्धन तार ताँबे के बनाये जाते हैं , क्योंकि ताँबे के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध कम होता है । मोटा तार लेने पर इसका प्रतिरोध नगण्य हो जाता है तथा विद्युत चालकता अधिक होती है ।
प्रश्न 18. विद्युत् स्त्रोत या सेल के वि.वा. बल से आप क्या समझते हैं ? इसका मात्रक लिखिए ।
उत्तर- विद्युत् स्रोत या सेल के कैथोड से एकांक धन आवेश को ऐनोड तक ले जाने में ( सेल के बाहर ) तथा एनोड से कैथोड तक ( सेल के भीतर ) ले जाने में सेल द्वारा किये गये कार्य को सेल का विद्युत् वाहक बल ( वि.वा. ) बल ) कहते हैं । इसका मात्रक वोल्ट होता है ।
प्रश्न 19. किसी सेल का वि.वा.बल किन - किन कारकों पर निर्भर करता है ?
उत्तर- किसी सेल का वि . वा . बल उसका अभिलाक्षणिक गुण होता है । सेल का वि . वा . बल इलेक्ट्रोडों एवं विद्युत् अपघट्य की प्रकृति पर निर्भर करता है ।
प्रश्न 20. किसी सेल के वि.वा.बल तथा टर्मिनल वोल्टता ( विभवान्तर ) से क्या समझते हैं ?
उत्तर- जब सेल खुले परिपथ में होता है अर्थात् जब उससे कोई धारा नहीं ली जा रही होती है , तब उसके इलेक्ट्रोडों के मध्य विभवान्तर को उस सेल का वि.वा.बल कहते हैं । जब सेल से धारा ली जा रही होती है अर्थात् जब सेल बन्द परिपथ में होता है , तब सेल के इलेक्ट्रोडों के मध्य विभवान्तर को टर्मिनल वोल्टता कहते हैं ।
प्रश्न 21. क्या विद्युत् क्षेत्र की प्लेटों के बीच विभवान्तर , उसके वि.वा.बल से अधिक भी हो सकता है ?
उत्तर- हाँ , जब विद्युत् सेल को आवेशित करते हैं , तब आवेशन के समय सेल की प्लेटों का विभवान्तर सेल के वि.वा.बल से अधिक होता है ।
प्रश्न 22. विभवमापी में ताँबे का तार क्यों नहीं लगाया जाता ?
उत्तर- विभवमापी का तार ऐसे पदार्थ का होना चाहिए जिसका प्रतिरोध ताप गुणांक नगण्य तथा विशिष्ट प्रतिरोध आदि ताँबे के तार का प्रतिरोध ताप गुणांक अधिक एवं विशिष्ट प्रतिरोधक कम होता है , इसलिए ताँबे के तार का उपयोग विभवमापी के तार में नहीं करते हैं । जबकि मैंगनीन व कांस्टेनन के तार का प्रतिरोध ताप गुणांक नगण्य तथा विशिष्ट प्रतिरोध अधिक होता है , इसलिए इन पदार्थों के तार का उपयोग विभवमापी में किया जाता है ।
प्रश्न 23. विभवमापी में विभव प्रवणता से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर- विभवमापी के प्रतिरोध तार के एकांक लम्बाई पर विभव पतन को विभव प्रवणता कहते हैं । इसे K से व्यक्त करते हैं । यदि विभवमापी के प्रतिरोध तार के सिरों का विभवान्तर V तथा तार की कुल लम्बाई L हो , तो विभव प्रवणता K = Y / L
प्रश्न 24. विभवमापी में तारों की संख्या अधिक क्यों रखी जाती है ?
उत्तर - विभवमापी में तारों की संख्या अधिक होने के कारण विभवमापी के तार की लम्बाई अधिक हो जाती है , जिससे विभव प्रवणता का मान कम हो जाता है और संतुलन बिन्दु अधिक लम्बाई पर प्राप्त होता है तथा अधिक यथार्थता एवं शुद्धतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता है ।
प्रश्न 25. विभवमापी के तार में विभव प्रवणता दुगुनी करने पर शून्य विक्षेप की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर- विभवमापी के तार में विभव प्रवणता दुगुनी करने पर सन्तुलन बिन्दु ( अविक्षेप बिन्दु ) पूर्व की आधी लम्बाई पर प्राप्त होगा ।
प्रश्न 26. विभवमापी , वोल्टमीटर से किस प्रकार श्रेष्ठ है ?
अथवा
विभवमापी एक आदर्श वोल्टमीटर है , इस कथन को समझाइये ।
उत्तर- जब किसी सेल का विद्युत् वाहक बल वोल्टमीटर से नापते हैं , तो हमें शुद्ध मान प्राप्त नहीं होता है । क्योंकि वोल्टमीटर को जब सेल से जोड़ते हैं तब वोल्टमीटर की सुई विक्षेप के लिए कुछ धारा अवश्य ही लेती है इस प्रकार सेल खुले परिपथ में नहीं रह पाती । सेल के आन्तरिक प्रतिरोध के कारण कुछ विभव पतन अवश्य ही हो जाता है । इसके विपरीत जब हम विभवमापी द्वारा किसी सेल का वि . वा . बल नापते हैं तब शून्य विक्षेप की स्थिति में सेल से कोई धारा नहीं ली जाती है अर्थात् सेल खुले परिपथ में रहता है । और विभवमापी द्वारा सेल के वि.वा. बल की शुद्ध माप प्राप्त होती है । इस प्रकार विभवमापी एक आदर्श वोल्टमीटर है ।
प्रश्न 6. विशिष्ट प्रतिरोध एवं प्रतिरोध में तीन अन्तर लिखिए |
उत्तर - विशिष्ट प्रतिरोध एवं प्रतिरोध में अन्तर -
विशिष्ट प्रतिरोध
1. इसका मान चालक के पदार्थ पर निर्भर करता है ।
2. चालक की लम्बाई या अनुप्रस्थ क्षेत्र बदलने से विशिष्ट प्रतिरोध नहीं बदलता है ।
3. इसका मात्रक ओम x मीटर है ।
प्रतिरोध
1. इसका मान चालक के पदार्थ , उसकी लम्बाई तथा अनुप्रस्थ क्षेत्र पर निर्भर करता है ।
2. चालक की लम्बाई या त्रिज्या बदलने से इसका प्रतिरोध बदल सकता है ।
3. इसका मात्रक ओम है ।
प्रश्न 9. विद्युत् वाहक बल और विभवान्तर में अंतर लिखिए ।
उत्तर- विद्युत् वाहक बल और विभवान्तर में अंतर -
विद्युत् वाहक बल
1. वि.वा.बल का उपयोग विद्युत् स्रोतों जैसे जनरेटर , सेल , बैटरी डायनमों आदि के लिये किया जाता है ।
2. विद्युत् परिपथ भंग होने पर भी इसका अस्तित्व रहता है ।
3. यह सेल के दोनों ध्रुवों के बीच अधिकतम विभवान्तर के बराबर होता है , यदि मेल खुला परिपथ में हो । 4. सेल का वि.वा.बल परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर नहीं करता ।
विभवान्तर
1. विभवान्तर शब्द का उपयोग किसी विद्युत् परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के लिये किया जाता है ।
2. विद्युत् परिपथ भंग होने पर इसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है ।
3. यह किसी विद्युत् परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के विभवों का अन्तर होता है ।
4. परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर उन दोनों बिन्दुओं के बीच लगे प्रतिरोध पर निर्भर करता है ।